श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.149.32 
ग्रामे गृहे वा ये द्रव्यं पारक्यं विजने स्थितम्।
नाभिनन्दन्ति वै नित्यं ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य किसी गाँव या घर में एकान्त स्थान पर पड़े हुए दूसरे के धन की कभी प्रशंसा नहीं करते, वे स्वर्ग जाते हैं ॥ 32॥
 
Those men who never praise someone else's wealth lying in a secluded place in a village or house, go to heaven. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)