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श्लोक  13.149.28 
उमोवाच
मनसा बद्‍ध्यते येन कर्मणा पुरुष: सदा।
तन्मे ब्रूहि महाभाग देवदेव पिनाकधृत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उमा ने पूछा - महाभाग! पिनाकधारी देवदेव! मुझे उस मानसिक कर्म के विषय में बताइए, जिसके कारण मनुष्य सदैव बंधन में पड़ता है॥28॥
 
Uman asked – Mahabhag! Pinakdhari Devdev! Tell me about the mental karma by which a person always falls into bondage. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)