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mahabharat 13.149.26: जो क्रोध में भी हृदय को भेदने वाले वचन नहीं बोलते, और क्रोध में भी केवल सान्त्वना देने वाले वचन बोलते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.149.26 
न कोपाद् व्याहरन्ते ये वाचं हृदयदारणीम्।
सान्त्वं वदन्ति क्रुद्धाऽपि ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जो क्रोध में भी हृदय को भेदने वाले वचन नहीं बोलते, और क्रोध में भी केवल सान्त्वना देने वाले वचन बोलते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं।
 
Those who, even in anger, do not utter words that pierce the heart, and even when furious, speak only comforting words, go to heaven. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)