श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.149.22 
परुषं ये न भाषन्ते कटुकं निष्ठुरं तथा।
अपैशुन्यरता: सन्तस्ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो सज्जन किसी की चुगली नहीं करते तथा किसी के प्रति कठोर, कटु या अप्रिय वचन नहीं बोलते, वे स्वर्ग जाते हैं।
 
Those gentlemen who do not gossip about anyone and never utter harsh, bitter or unkind words to anyone, go to heaven. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)