Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.149.12-13h: जो मनुष्य अपने धन से संतुष्ट रहते हैं और चोरी से दूर रहते हैं तथा जो केवल भाग्य पर ही निर्भर रहकर जीवन जीते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं ॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  13.149.12-13h 
स्तैन्यान्निवृत्ता: सततं संतुष्टा: स्वधनेन च॥ १२॥
स्वभाग्यान्युपजीवन्ति ते नरा: स्वर्गगामिन:।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपने धन से संतुष्ट रहते हैं और चोरी से दूर रहते हैं तथा जो केवल भाग्य पर ही निर्भर रहकर जीवन जीते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं ॥12 1/2॥
 
Those who are satisfied with their own wealth and stay away from theft and who live their lives relying solely on their destiny, they go to heaven. ॥12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)