श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  13.148.40 
सदोपवासी नियत: स्वाध्यायनिरत: शुचि:।
बर्हिष्कान्तरिते नित्यं शयानोऽग्निगृहे सदा॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
सदा व्रत करो, अर्थात् एकादशी आदि का उपवास करो और अन्य दिनों में भी केवल दो बार ही भोजन करो। बीच में कुछ मत खाओ। नियम से रहो, वेद-शास्त्रों के स्वाध्याय में तत्पर रहो, पवित्र रहो और प्रतिदिन अग्निस्थान में कुशा बिछाकर सोओ। ॥40॥
 
Always observe fasts, i.e. fast on Ekadasi etc. and on the other days also eat only twice a day. Do not eat anything in between. Live according to rules, be devoted to the study of Vedas and scriptures, be pure and sleep on a kusha mat in the fire place every day. ॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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