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श्लोक 13.148.4  |
केन वा कर्मणा विप्र: शूद्रयोनौ प्रजायते।
क्षत्रिय: शूद्रतामेति केन वा कर्मणा विभो॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| हे प्रभु! कौन-सा कर्म करने से ब्राह्मण शूद्र जन्म लेता है, अथवा कौन-सा कर्म करने से क्षत्रिय शूद्र बनता है? |
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| Lord! By doing which deed does a Brahmin take birth as a Shudra or by which deed does a Kshatriya become a Shudra? 4॥ |
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