श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 148: ब्राह्मणादि वर्णोंकी प्राप्तिमें मनुष्यके शुभाशुभ कर्मोंकी प्रधानताका प्रतिपादन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.148.12 
तत्रासौ निरयं प्राप्तो वर्णभ्रष्टो बहिष्कृत:।
ब्रह्मलोकात् परिभ्रष्ट: शूद्र: समुपजायते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण-जाति का मनुष्य शूद्र-कर्म करने के कारण वर्ण भ्रष्ट होकर जाति से बहिष्कृत हो जाता है और मृत्यु के बाद ब्रह्मलोक की प्राप्ति से वंचित होकर नरक में पड़ता है। तत्पश्चात् वह शूद्र योनि में जन्म लेता है। 12॥
 
A Brahmin-caste man gets ostracized from his caste by getting corrupted by his varna due to doing Shudra-karma and after death, he is deprived of attaining Brahmalok and falls into hell. After this he takes birth in the womb of a Shudra. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)