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mahabharat 13.147.d38-d39: वे प्रतिदिन नाना प्रकार के स्तोत्रों से उदित होते हुए सूर्य की स्तुति करते हुए आगे बढ़ते रहते हैं और अपनी सूर्य के समान किरणों से सम्पूर्ण दिशाओं को प्रकाशित करते रहते हैं। वे सभी धर्म के ज्ञाता और सत्यवादी हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक d38-d39
 
 
श्लोक  13.147.d38-d39 
उद्यन्तं सततं सूर्यं स्तुवन्तो विविधै: स्तवै:।
भास्करस्येव किरणै: सहसा यान्ति नित्यदा॥
द्योतयन्तो दिश: सर्वा धर्मज्ञा: सत्यवादिन:॥
 
 
अनुवाद
वे प्रतिदिन नाना प्रकार के स्तोत्रों से उदित होते हुए सूर्य की स्तुति करते हुए आगे बढ़ते रहते हैं और अपनी सूर्य के समान किरणों से सम्पूर्ण दिशाओं को प्रकाशित करते रहते हैं। वे सभी धर्म के ज्ञाता और सत्यवादी हैं।
 
Every day they keep moving ahead while continuously praising the rising Sun with various types of hymns and keep illuminating all directions with their sun-like rays. All of them are knowledgeable about Dharma and truthful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)