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mahabharat 13.147.d20: वह बोली - प्रभु! मैं उन वानप्रस्थ मुनियों के धर्म को जानना चाहती हूँ जो रथ पर सवार होकर यात्रा करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.147.d20 
उमोवाच
तेषां चक्रचराणां च धर्ममिच्छामि वै प्रभो॥
 
 
अनुवाद
वह बोली - प्रभु! मैं उन वानप्रस्थ मुनियों के धर्म को जानना चाहती हूँ जो रथ पर सवार होकर यात्रा करते हैं।
 
She said - Lord! I want to know the religion of those sages who travel in carts among the Vanaprastha sages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)