Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.147.d17-d19: वहाँ भी वे नाना प्रकार के सुखों से युक्त, दिव्य सुगन्ध से युक्त, दिव्य आभूषण धारण करके सुन्दर विमानों पर बैठकर इच्छानुसार दिव्य स्त्रियों का संग करते हैं। देवि! मैंने तुम्हें यात्रियों का यह सब कर्तव्य बता दिया। अब तुम और क्या सुनना चाहती हो? | mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्र ते भोगसंयुक्ता दिव्यगन्धसमन्विता:॥
दिव्यभूषणसंयुक्ता विमानवरसंयुता:।
विचरन्ति यथाकामं दिव्यस्त्रीगणसंयुता:॥
एतत् ते कथितं देवि किं भूय: श्रोतुमिच्छसि॥
अनुवाद
वहाँ भी वे नाना प्रकार के सुखों से युक्त, दिव्य सुगन्ध से युक्त, दिव्य आभूषण धारण करके सुन्दर विमानों पर बैठकर इच्छानुसार दिव्य स्त्रियों का संग करते हैं। देवि! मैंने तुम्हें यात्रियों का यह सब कर्तव्य बता दिया। अब तुम और क्या सुनना चाहती हो?
There also, equipped with various types of pleasures and filled with divine fragrance, wearing divine ornaments, they sit on beautiful planes and enjoy the company of divine women as per their wish. Devi! I have told you all this duty of the travellers. What else do you wish to hear?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥