Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.147.d16: हे निर्मल मुस्कान वाली देवी! वे सर्दी, गर्मी और वर्षा के कष्टों को सहन करते हुए घोर तपस्या करते हैं और उचित समय पर मृत्यु को प्राप्त होकर स्वर्ग को जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक d16
 
 
श्लोक  13.147.d16 
वर्षै: शीतातपैरेव कुर्वन्त: परमं तप:॥
कालयोगेन गच्छन्ति शक्रलोकं शुचिस्मिते।
 
 
अनुवाद
हे निर्मल मुस्कान वाली देवी! वे सर्दी, गर्मी और वर्षा के कष्टों को सहन करते हुए घोर तपस्या करते हैं और उचित समय पर मृत्यु को प्राप्त होकर स्वर्ग को जाते हैं।
 
O Goddess with a pure smile! They endure the hardships of winter, summer and rain and perform severe penance, and after meeting the death at the right time, they go to heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)