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mahabharat 13.147.56: वह इन्द्रलोक को जाता है और सदैव अपनी समस्त कामनाओं से युक्त रहता है। उस पर दिव्य पुष्पों की वर्षा होती है और वह दिव्य चन्दन से सुशोभित होता है ॥ 56॥   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  13.147.56 
स शक्रलोकगो नित्यं सर्वकामपुरस्कृत:।
दिव्यपुष्पसमाकीर्णो दिव्यचन्दनभूषित:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
वह इन्द्रलोक को जाता है और सदैव अपनी समस्त कामनाओं से युक्त रहता है। उस पर दिव्य पुष्पों की वर्षा होती है और वह दिव्य चन्दन से सुशोभित होता है ॥ 56॥
 
He goes to Indraloka and is always blessed with all his desires. Divine flowers shower on him and he is adorned with divine sandalwood. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)