vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा
»
श्लोक 51
श्लोक
13.147.51
चीर्त्वा द्वादशवर्षाणि दीक्षामेतां मनोगताम्।
स्वर्गलोकमवाप्नोति देवैश्च सह मोदते॥ ५१॥
अनुवाद
जो मनुष्य बारह वर्षों तक इस गहन दीक्षा का पालन करता है, वह स्वर्ग में जाता है और देवताओं के साथ आनंद भोगता है ॥ 51॥
He who follows this deep initiation for twelve years goes to heaven and enjoys bliss with the gods. ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×