श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  13.147.51 
चीर्त्वा द्वादशवर्षाणि दीक्षामेतां मनोगताम्।
स्वर्गलोकमवाप्नोति देवैश्च सह मोदते॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य बारह वर्षों तक इस गहन दीक्षा का पालन करता है, वह स्वर्ग में जाता है और देवताओं के साथ आनंद भोगता है ॥ 51॥
 
He who follows this deep initiation for twelve years goes to heaven and enjoys bliss with the gods. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)