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mahabharat 13.147.48-49h: जो बारह वर्ष तक एकान्तवास करके दीक्षा लेता है और फिर समुद्र में शरीर त्याग देता है, वह वरुणलोक में सुख भोगता है।   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.147.48-49h 
आत्मानमुपजीवन् यो दीक्षां द्वादशवार्षिकीम्॥ ४८॥
त्यक्त्वा महार्णवे देहं वारुणं लोकमश्नुते।
 
 
अनुवाद
जो बारह वर्ष तक एकान्तवास करके दीक्षा लेता है और फिर समुद्र में शरीर त्याग देता है, वह वरुणलोक में सुख भोगता है।
 
He who, living on his own, takes initiation for twelve years and then gives up his body in the ocean, enjoys happiness in Varunaloka. 48 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)