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आत्मानमुपजीवन् यो नियतो नियताशन:॥ ४७॥
देहं वानशने त्यक्त्वा स स्वर्गं समुपाश्नुते।
अनुवाद
जो व्यक्ति पूरी तरह से अपनी इच्छानुसार जीवन जीता है और नियमित रूप से भोजन करता है या जो उपवास करके अपने शरीर का त्याग करता है, वह स्वर्ग का आनंद भोगता है।
He who lives solely on his own terms and eats regularly or who abandons his body by fasting, enjoys the bliss of heaven.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥