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mahabharat 13.147.38: श्री महेश्वर बोले - जो व्रत से परिपूर्ण होकर, इन्द्रियों को दृढ़ करके, हिंसा से रहित होकर और सत्यनिष्ठ होकर सिद्धियाँ प्राप्त कर चुके हैं, वे मरने के बाद रोगों और शोकों से मुक्त होकर गन्धर्वों के साथ रहकर सुख भोगते हैं ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.147.38 
श्रीमहेश्वर उवाच
उपवासव्रतैर्दान्ता ह्यहिंस्रा: सत्यवादिन:।
संसिद्धा: प्रेत्य गन्धर्वै: सह मोदन्त्यनामया:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - जो व्रत से परिपूर्ण होकर, इन्द्रियों को दृढ़ करके, हिंसा से रहित होकर और सत्यनिष्ठ होकर सिद्धियाँ प्राप्त कर चुके हैं, वे मरने के बाद रोगों और शोकों से मुक्त होकर गन्धर्वों के साथ रहकर सुख भोगते हैं ॥38॥
 
Shri Maheshwar said - Those who have attained Siddhis by being full of fasting, having strong senses, being free from violence and being truthful, after death they are free from diseases and sorrows and enjoy happiness by living with the Gandharvas. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)