Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.147.34: उन्होंने पूछा - हे प्रभु! जो तपस्वी तपस्वी हैं और अपने आश्रम के धर्म में तत्पर रहते हैं, वे किस आचरण से तपस्वी बनते हैं?॥ 34॥ | mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उमोवाच
आश्रमाभिरता देव तापसा ये तपोधना:।
दीप्तिमन्त: कया चैव चर्ययाथ भवन्ति ते॥ ३४॥
अनुवाद
उन्होंने पूछा - हे प्रभु! जो तपस्वी तपस्वी हैं और अपने आश्रम के धर्म में तत्पर रहते हैं, वे किस आचरण से तपस्वी बनते हैं?॥ 34॥
He asked - O Lord! Those ascetics who are full of austerity and are engrossed in the religion of their ashram, by what conduct do they become ascetics?॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥