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mahabharat 13.147.33: जो मनुष्य आलस्य से रहित, धार्मिक, अपनी शक्ति के अनुसार उत्तम मार्ग का अनुसरण करने वाला, उत्तम चरित्र वाला और ज्ञानी है, वह ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.147.33 
व्यपेततन्द्रिर्धर्मात्मा शक्त्या सत्पथमाश्रित:।
चारित्रपरमो बुद्धो ब्रह्मभूयाय कल्पते॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य आलस्य से रहित, धार्मिक, अपनी शक्ति के अनुसार उत्तम मार्ग का अनुसरण करने वाला, उत्तम चरित्र वाला और ज्ञानी है, वह ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है ॥33॥
 
The man who is free from laziness, religious, follows the best path according to his power, has good character and is knowledgeable, he attains Brahmabhava. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)