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mahabharat 13.147.30: सरलता को धर्म और कुटिलता को अधर्म कहते हैं। सरलता से युक्त मनुष्य ही यहाँ धर्म का फल भोगता है ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.147.30 
आर्जवं धर्ममित्याहुरधर्मो जिह्म उच्यते।
आर्जवेनेह संयुक्तो नरो धर्मेण युज्यते॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
सरलता को धर्म और कुटिलता को अधर्म कहते हैं। सरलता से युक्त मनुष्य ही यहाँ धर्म का फल भोगता है ॥30॥
 
Simplicity is called Dharma and crookedness is called Adharma. Only a man endowed with simplicity enjoys the fruits of Dharma here. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)