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mahabharat 13.147.29: चारों वेदों में पारंगत होना तथा सभी जीवों के प्रति सरलता का व्यवहार करना - दोनों को एक ही माना जाता है अथवा सरलता को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.147.29 
सर्ववेदेषु वा स्नानं सर्वभूतेषु चार्जवम्।
उभे एते समे स्यातामार्जवं वा विशिष्यते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
चारों वेदों में पारंगत होना तथा सभी जीवों के प्रति सरलता का व्यवहार करना - दोनों को एक ही माना जाता है अथवा सरलता को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
 
Being proficient in all the four Vedas and behaving with simplicity towards all living beings - both are considered the same or simplicity is considered more important.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)