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mahabharat 13.147.28: जो सभी प्राणियों पर दया करता है, सबके साथ सरलता से व्यवहार करता है, तथा सभी प्राणियों को आत्मा के समान देखता है, वही धर्म का फल प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.147.28 
सर्वभूतानुकम्पी य: सर्वभूतार्जवव्रत:।
सर्वभूतात्मभूतश्च स वै धर्मेण युज्यते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जो सभी प्राणियों पर दया करता है, सबके साथ सरलता से व्यवहार करता है, तथा सभी प्राणियों को आत्मा के समान देखता है, वही धर्म का फल प्राप्त करता है।
 
He who is kind to all creatures, treats everyone with simplicity, and looks at all beings as the self, he alone receives the fruits of Dharma. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)