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mahabharat 13.147.27: जो हिंसा के पाप से मुक्त है और सभी प्राणियों को संरक्षण देता है, वही धर्म का फल प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.147.27 
सर्वभूतेषु य: सम्यग् ददात्यभयदक्षिणाम्।
हिंसादोषविमुक्तात्मा स वै धर्मेण युज्यते॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जो हिंसा के पाप से मुक्त है और सभी प्राणियों को संरक्षण देता है, वही धर्म का फल प्राप्त करता है।
 
He who is free from the sin of violence and gives protection to all creatures, he alone receives the fruits of Dharma. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)