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mahabharat 13.147.23: दोनों प्रकार के मुनियों का महान् कर्तव्य है कि वे दिन में तीन बार जल से स्नान करें और अग्नि में आहुति दें। उन्हें ध्यान करना चाहिए, सन्मार्ग का अनुसरण करना चाहिए और शास्त्रविहित कर्म करने चाहिए॥23॥   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.147.23 
त्रिकालमभिषेकश्च होत्रं त्वृषिकृतं महत्।
समाधिसत्पथस्थानं यथोद्दिष्टनिषेवणम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
दोनों प्रकार के मुनियों का महान् कर्तव्य है कि वे दिन में तीन बार जल से स्नान करें और अग्नि में आहुति दें। उन्हें ध्यान करना चाहिए, सन्मार्ग का अनुसरण करना चाहिए और शास्त्रविहित कर्म करने चाहिए॥23॥
 
It is the great duty of both types of sages to bathe in water three times a day and offer oblations in fire. They should meditate, follow the right path and perform the deeds prescribed in the scriptures.॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)