Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.147.21: जो वनवासी ऋषिगण ज्ञान-सभाओं में सिद्ध कहे गए हैं, उनमें से कुछ तो अकेले ही विचरण करते हैं, कुछ अपनी पत्नियों के साथ रहते हैं। उनका धर्म कैसा माना गया है?॥ 21॥ | mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सिद्धिवादेषु संसिद्धास्तथा वननिवासिन:।
स्वैरिणो दारसंयुक्तास्तेषां धर्म: कथं स्मृत:॥ २१॥
अनुवाद
जो वनवासी ऋषिगण ज्ञान-सभाओं में सिद्ध कहे गए हैं, उनमें से कुछ तो अकेले ही विचरण करते हैं, कुछ अपनी पत्नियों के साथ रहते हैं। उनका धर्म कैसा माना गया है?॥ 21॥
Those forest dwelling sages who have been described as perfect in the knowledge seminars, some wander freely alone, some live with their wives. What is their religion considered to be like?॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥