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mahabharat 13.147.14: अग्निहोत्र और पंचमहायज्ञों का नित्य सेवन वानप्रस्थों का धर्म है। उन्हें वेदविहित पंचयज्ञों का निरन्तर पालन करना चाहिए। 14॥   |   mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.147.14 
तेषां होमक्रिया धर्म: पञ्चयज्ञनिषेवणम्।
भागं च पञ्चयज्ञस्य वेदोक्तस्यानुपालनम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अग्निहोत्र और पंचमहायज्ञों का नित्य सेवन वानप्रस्थों का धर्म है। उन्हें वेदविहित पंचयज्ञों का निरन्तर पालन करना चाहिए। 14॥
 
Daily consumption of Agnihotra and Panchmahayagyas is the religion of Vanaprasthas. They should continuously perform the Pancha-Yagya prescribed by the Vedas. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)