Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.147.10: मनुष्य को सदैव वीरासन में बैठना चाहिए और चबूतरे या वेदी पर सोना चाहिए। धर्म में निपुण वानप्रस्थ मुनियों को शीतोयग्नियोग करना चाहिए, अर्थात् शीतकाल में रात्रि में जल में बैठना या खड़ा होना चाहिए, वर्षाकाल में खुले मैदान में सोना चाहिए और ग्रीष्मकाल में पंचाग्निका का सेवन करना चाहिए।॥10॥ | mahabharat अध्याय 13.147: उमा-महेश्वर-संवाद, वानप्रस्थ-धर्म तथा उसके पालनकी विधि और महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य को सदैव वीरासन में बैठना चाहिए और चबूतरे या वेदी पर सोना चाहिए। धर्म में निपुण वानप्रस्थ मुनियों को शीतोयग्नियोग करना चाहिए, अर्थात् शीतकाल में रात्रि में जल में बैठना या खड़ा होना चाहिए, वर्षाकाल में खुले मैदान में सोना चाहिए और ग्रीष्मकाल में पंचाग्निका का सेवन करना चाहिए।॥10॥
One should always sit in Veerasan and sleep on a platform or altar. The Vanaprastha monks having wisdom in religion should perform Shitatoyagniyoga i.e. they should sit or stand in water at night during winters, sleep in open ground during rains and consume Panchagnika during summers.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥