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श्रीमहेश्वर उवाच
शस्त्रागमं ते वक्ष्यामि शृणु धर्म्यं शुचिस्मिते।
युगान्तरे महादेवि कण्वो नाम महामुनि:॥
स हि दिव्यां तपश्चर्यां कर्तुमेवोपचक्रमे।
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- हे महादेवी, पवित्र मुस्कान वाली! सुनो। मैं तुम्हें बता रहा हूँ कि मैंने किस प्रकार धर्मानुसार शस्त्र प्राप्त किए हैं। युगान्तर में कण्व नाम के एक महान ऋषि थे। वे दिव्य तपस्या करने लगे।
Shri Maheshwar said- O Mahadevi with a pure smile! Listen. I am telling you how I have acquired weapons in accordance with Dharma. In the Yugantar, there was a great sage named Kanva. He started performing divine penance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥