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mahabharat 13.146.d54: प्रथम तीन वर्ण शूद्र आधारित हैं क्योंकि शूद्र सेवा कार्य करने वाले माने गए हैं। ब्राह्मण आदि की सेवा करना दास या शूद्र का धर्म माना गया है।   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.d54 
त्रय: पूर्वे शूद्रमूला: सर्वे कर्मकरा: स्मृता:।
ब्राह्मणादिषु शुश्रूषा दासधर्म इति स्मृत:॥
 
 
अनुवाद
प्रथम तीन वर्ण शूद्र आधारित हैं क्योंकि शूद्र सेवा कार्य करने वाले माने गए हैं। ब्राह्मण आदि की सेवा करना दास या शूद्र का धर्म माना गया है।
 
The first three Varnas are all Shudra based because Shudras are considered to be the ones who perform the work of service. Serving Brahmins etc. is considered to be the religion of a slave or Shudra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)