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श्लोक  13.146.d4 
तत्कृता नीलता चासीत् कण्ठे बर्हिनिभा शुभे।
तदाप्रभृति चैवाहं नीलकण्ठ इति स्मृत:॥
एतत् ते सर्वमाख्यातं किं भूय: श्रोतुमिच्छसि।
 
 
अनुवाद
शुभ! उस विष के कारण मेरी गर्दन पर मोरपंख जैसा नीला निशान बन गया। तभी से मैं नीलकंठ कहलाया। ये सब बातें मैंने तुम्हें बता दीं। अब और क्या सुनना चाहते हो?
 
Shubh! Because of that poison, a blue mark like a peacock feather was formed on my neck. Since then I came to be known as Neelkanth. I have told you all these things. What else do you want to hear now?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)