Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.146.d32: हे महादेव, आप जो अपने हाथों में त्रिशूल धारण करते हैं और सर्पों के आभूषणों से सुशोभित हैं, आपको नमस्कार है। हे त्रिलोचन, आप जिन्होंने दक्ष यज्ञ को जलाया, आपको नमस्कार है।   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d32
 
 
श्लोक  13.146.d32 
नमस्त्रिशूलहस्ताय पन्नगाभरणाय च।
नमोऽस्तु विषमाक्षाय दक्षयज्ञप्रदाहक॥
 
 
अनुवाद
हे महादेव, आप जो अपने हाथों में त्रिशूल धारण करते हैं और सर्पों के आभूषणों से सुशोभित हैं, आपको नमस्कार है। हे त्रिलोचन, आप जिन्होंने दक्ष यज्ञ को जलाया, आपको नमस्कार है।
 
Salutations to you Mahadeva, who holds trishul in his hands and is adorned with ornaments made of snakes. Salutations to you Trilochan, who burnt the Daksha Yagna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)