Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.146.d24: यह सम्पूर्ण जगत अग्नि-सोम रूपी उन शीत और उष्ण तत्त्वों में उलझा हुआ है। भगवान विष्णु में सौम्य गुणों की स्थिति सदैव विद्यमान रहती है और मुझमें अग्नि (तैजस) गुण प्रतिष्ठित हैं। इस प्रकार मैं इस विष्णु और शिव रूपी शरीर से समस्त लोकों की सदैव रक्षा करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d24
 
 
श्लोक  13.146.d24 
तयोर्हि ग्रथितं सर्वं सौम्याग्नेयमिदं जगत‍्।
सौम्यत्वं सततं विष्णौ मय्याग्नेयं प्रतिष्ठितम्॥
अनेन वपुषा नित्यं सर्वलोकान् बिभर्म्यहम्।
 
 
अनुवाद
यह सम्पूर्ण जगत अग्नि-सोम रूपी उन शीत और उष्ण तत्त्वों में उलझा हुआ है। भगवान विष्णु में सौम्य गुणों की स्थिति सदैव विद्यमान रहती है और मुझमें अग्नि (तैजस) गुण प्रतिष्ठित हैं। इस प्रकार मैं इस विष्णु और शिव रूपी शरीर से समस्त लोकों की सदैव रक्षा करता हूँ।
 
This entire world is entangled in those cold and hot elements in the form of Agni-Soma. The state of gentle qualities is always present in Lord Vishnu and the fiery (Taijas) qualities are established in me. In this way, I always protect all the worlds with this body of Vishnu and Shiva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)