vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण
»
श्लोक d22
श्लोक
13.146.d22
रौद्रं भयानकं घोरं शूलपट्टिशसंयुतम्।
किमर्थं त्वीदृशं रूपं तन्मे शंसितुमर्हसि॥
अनुवाद
आपका यह रूप इतना भयंकर, विकराल, भयंकर तथा भालों, पट्टियों आदि से विभूषित क्यों है? कृपया मुझे यह बताइए।
Why is your form so fierce, dreadful, terrible and adorned with spears and bandages etc.? Please tell me this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×