श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक d22
 
 
श्लोक  13.146.d22 
रौद्रं भयानकं घोरं शूलपट्टिशसंयुतम्।
किमर्थं त्वीदृशं रूपं तन्मे शंसितुमर्हसि॥
 
 
अनुवाद
आपका यह रूप इतना भयंकर, विकराल, भयंकर तथा भालों, पट्टियों आदि से विभूषित क्यों है? कृपया मुझे यह बताइए।
 
Why is your form so fierce, dreadful, terrible and adorned with spears and bandages etc.? Please tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)