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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण
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श्लोक d20
श्लोक
13.146.d20
उमोवाच
भगवन् देवदेवेश त्रिनेत्र वृषभध्वज।
पिङ्गलं विकृतं भाति रूपं ते तु भयानकम्॥
अनुवाद
उमान ने पूछा - प्रभु! देवदेवेश्वर! त्रिनेत्र! वृषभध्वज! आपका स्वरूप विकृत, विरूप और भयावह प्रतीत होता है।
Uman asked – Lord! Devdeveshwar! Trinetra! Taurus flag! Your form appears distorted, deformed and horrifying.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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