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mahabharat 13.146.75: शूद्र गृहस्थ को चाहिए कि वह अपनी शक्ति के अनुसार तीनों वर्णों का हर प्रकार से निरंतर सत्कार करे। उसका मुख्य कर्तव्य ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य - तीनों वर्णों की सेवा करना बताया गया है ॥ 75॥   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.75 
सर्वातिथ्यं त्रिवर्गस्य यथाशक्ति निशानिशम्।
शूद्रधर्म: समाख्यातस्त्रिवर्गपरिचारणम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
शूद्र गृहस्थ को चाहिए कि वह अपनी शक्ति के अनुसार तीनों वर्णों का हर प्रकार से निरंतर सत्कार करे। उसका मुख्य कर्तव्य ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य - तीनों वर्णों की सेवा करना बताया गया है ॥ 75॥
 
A Shudra householder should, according to his capacity, constantly offer hospitality to all the three castes in every way. The main duty for him has been stated to be to serve the three castes - Brahmin, Kshatriya and Vaishya. ॥ 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)