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mahabharat 13.146.74: जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर जल से कुल्ला करके ब्राह्मणों को भोजन के लिए बुलाता है, तथा समय पर उन्हें आदरपूर्वक भोजन कराकर कुछ दूर तक उनके पीछे चलता है, वह सनातन धर्म का पालन करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.74 
प्रातरुत्थाय चाचम्य भोजनेनोपमन्त्र्य च।
सत्कृत्यानुव्रजेद् यस्तु तस्य धर्म: सनातन:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर जल से कुल्ला करके ब्राह्मणों को भोजन के लिए बुलाता है, तथा समय पर उन्हें आदरपूर्वक भोजन कराकर कुछ दूर तक उनके पीछे चलता है, वह सनातन धर्म का पालन करता है।
 
He who wakes up in the morning, rinses his mouth with water and invites Brahmins for meals, and after feeding them respectfully at the right time, follows them for some distance, is following the eternal religion. 74.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)