Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.146.52-53: जो राजा संकटग्रस्त प्रजा की सहायता करता है, वह इस लोक में भी आदरणीय होता है और परलोक में भी। जो वीरता दिखाकर गौओं और ब्राह्मणों को संकट से बचाने के लिए युद्ध में प्राण देता है, वह स्वर्ग में अश्वमेध यज्ञ करके जीते हुए लोकों पर अधिकार प्राप्त करता है। ॥52-53॥ | mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो राजा संकटग्रस्त प्रजा की सहायता करता है, वह इस लोक में भी आदरणीय होता है और परलोक में भी। जो वीरता दिखाकर गौओं और ब्राह्मणों को संकट से बचाने के लिए युद्ध में प्राण देता है, वह स्वर्ग में अश्वमेध यज्ञ करके जीते हुए लोकों पर अधिकार प्राप्त करता है। ॥52-53॥
The king who gives a helping hand to the distressed people is respected in this world as well as the next. The one who shows valour and dies in a battle to save cows and Brahmins from danger, gains control over the worlds won by performing Ashwamedha sacrifices in heaven. ॥52-53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥