Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.146.41: यज्ञ करना और किसी भी प्राणी को कष्ट न पहुँचाना, यही उसका परम धर्म है। घर में पहले भोजन न करना और निराशावादी होना - परिवार के सदस्यों के भोजन करने के बाद ही बचा हुआ भोजन खाना - यह भी उसका धर्म है॥ 41॥ | mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यज्ञश्च परमो धर्मस्तथाहिंसा च देहिषु।
अपूर्वभोजनं धर्मो विघसाशित्वमेव च॥ ४१॥
अनुवाद
यज्ञ करना और किसी भी प्राणी को कष्ट न पहुँचाना, यही उसका परम धर्म है। घर में पहले भोजन न करना और निराशावादी होना - परिवार के सदस्यों के भोजन करने के बाद ही बचा हुआ भोजन खाना - यह भी उसका धर्म है॥ 41॥
Performing sacrifices and not harming any living being is the ultimate religion for him. Not eating first in the house and being a pessimist - eating the leftovers only after the family members have eaten - this is also his religion.॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥