Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.146.4: तिलोत्तमा के रूप को देखने की इच्छा से मैं योगबल से चतुर्मुख और चतुर्मुख हो गया। इस प्रकार मैंने लोगों को महायोग का बल दिखाया॥4॥ | mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तिलोत्तमा के रूप को देखने की इच्छा से मैं योगबल से चतुर्मुख और चतुर्मुख हो गया। इस प्रकार मैंने लोगों को महायोग का बल दिखाया॥4॥
With the desire to see the form of Tilottama, I became four-faced and four-faced with the power of yoga. In this way I showed people the power of great yoga. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥