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mahabharat 13.146.11: एक दिन उसके बछड़े के मुँह से निकला झाग मेरे शरीर पर गिर गया। इससे मुझे गुस्सा आया और मैंने गायों को जलाना शुरू कर दिया। मेरे गुस्से से जलती हुई गायें कई अलग-अलग रंगों में बदल गईं। 11.   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.146.11 
तस्या वत्समुखोत्सृष्ट: फेनो मद्‍गात्रमागत:।
ततो दग्धा मया गावो नानावर्णत्वमागता:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
एक दिन उसके बछड़े के मुँह से निकला झाग मेरे शरीर पर गिर गया। इससे मुझे गुस्सा आया और मैंने गायों को जलाना शुरू कर दिया। मेरे गुस्से से जलती हुई गायें कई अलग-अलग रंगों में बदल गईं। 11.
 
One day the foam coming out of the mouth of her calf fell on my body. This made me angry and I started scorching the cows. The cows burnt in my anger took on many different colours. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)