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सर्वेष्वेवर्षिधर्मेषु ज्ञेयोऽऽत्मा संयतेन्द्रियै:।
कामक्रोधौ तत: पश्चाज्जेतव्याविति मे मति:॥ १०८॥
अनुवाद
समस्त आर्षधर्मों में इन्द्रियों को वश में करके आत्मज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है। फिर काम और क्रोध पर भी विजय प्राप्त करनी चाहिए। ऐसा मेरा मत है ॥108॥
In all the Arshadharmas, it is necessary to attain self-knowledge by controlling the senses. Then, lust and anger should also be conquered. This is my opinion. ॥108॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥