Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.146.108: समस्त आर्षधर्मों में इन्द्रियों को वश में करके आत्मज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है। फिर काम और क्रोध पर भी विजय प्राप्त करनी चाहिए। ऐसा मेरा मत है ॥108॥   |   mahabharat अध्याय 13.146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 146: शिव-पार्वतीका धर्मविषयक संवाद—वर्णाश्रमधर्मसम्बन्धी आचार एवं प्रवृत्ति-निवृत्तिरूप धर्मका निरूपण  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  13.146.108 
सर्वेष्वेवर्षिधर्मेषु ज्ञेयोऽऽत्मा संयतेन्द्रियै:।
कामक्रोधौ तत: पश्चाज्जेतव्याविति मे मति:॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
समस्त आर्षधर्मों में इन्द्रियों को वश में करके आत्मज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है। फिर काम और क्रोध पर भी विजय प्राप्त करनी चाहिए। ऐसा मेरा मत है ॥108॥
 
In all the Arshadharmas, it is necessary to attain self-knowledge by controlling the senses. Then, lust and anger should also be conquered. This is my opinion. ॥108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)