श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  13.145.d8 
तस्माद् यदा मां स्पृशति शुभं वा यदि वेतरत्।
तथैवेदं जगत‍् सर्वं तत्तद् भवति शोभने॥ )
 
 
अनुवाद
इसीलिए जब कोई शुभ या अशुभ चीज मेरे संपर्क में आती है, तो पूरा संसार भी शुभ या अशुभ हो जाता है।
 
That is why when something auspicious or inauspicious comes into contact with me, then the entire world becomes auspicious or inauspicious as well.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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