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श्लोक 13.145.d3  |
नारद उवाच
एवमुक्तस्तथा देव्या प्रीयमाणोऽब्रवीद् भव:॥ ) |
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| अनुवाद |
| नारदजी कहते हैं- देवी पार्वती की यह बात सुनकर भगवान शंकर प्रसन्न हो गए और बोले। |
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| Naradji says-On hearing Goddess Parvati say this, Lord Shankar became happy and said. |
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