Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.145.6: अनेकों के मुख उल्लुओं के समान थे। अनेक भयानक भूतों के मुख भेड़ियों और बाजों के समान थे। तथा कुछ के मुख मृगों के समान थे। वे सभी नाना प्रकार के रंग वाले और सब जातियों से युक्त थे। ॥6॥ | mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनेकों के मुख उल्लुओं के समान थे। अनेक भयानक भूतों के मुख भेड़ियों और बाजों के समान थे। तथा कुछ के मुख मृगों के समान थे। वे सभी नाना प्रकार के रंग वाले और सब जातियों से युक्त थे। ॥6॥
Many had faces like owls. Many dreadful ghosts had faces like wolves and hawks. And some had faces like deer. All of them had different types of colours and were endowed with all castes. ॥ 6 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥