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श्लोक 13.145.50  |
भीष्म उवाच
एवमुक्त: स भगवान् शैलपुत्र्या पिनाकधृत्।
तस्या धृत्या च बुद्ध्या च प्रीतिमानभवत् प्रभु:॥ ५०॥ |
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| अनुवाद |
| भीष्मजी कहते हैं - राजन ! जब गिरिराजकुमारी उमा ने इस प्रकार पूछा, तब पिनाकधारी भगवान शिव उनके धैर्य और बुद्धिमता से अत्यन्त प्रसन्न हुए ॥50॥ |
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| Bhishmaji says – King! When Girirajkumari Uma asked in this manner, Pinakadhari Lord Shiva was very pleased with her patience and wisdom. 50॥ |
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