|
| |
| |
श्लोक 13.145.40  |
उमोवाच
भगवन् सर्वभूतेश शूलपाणे महाव्रत।
संशयो मे महान् जातस्तन्मे व्याख्यातुमर्हसि॥ ४०॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| उमा बोलीं- हे प्रभु! समस्त देवताओं के स्वामी! शूलपाणे! महान व्रतधारी महेश्वर! मेरे मन में एक महान् संशय उत्पन्न हो गया है। आप मुझे उसका स्पष्टीकरण दीजिए। |
| |
| Uma said-Lord! Lord of all Gods! Shulpane! Great fasting Maheshwar! A great doubt has arisen in my mind. You explain it to me. |
| ✨ ai-generated |
| |
|