Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.145.38: उनकी दृष्टि उस पर पड़ते ही सम्पूर्ण हिमालय पर्वत क्षण भर में अपनी मूल अवस्था में आ गया। वह देखने में अत्यंत सुन्दर हो गया। प्रसन्नता से भरे पक्षी वहाँ चहचहाने लगे। उस वन के वृक्ष सुन्दर पुष्पों से सुशोभित हो गए। 38। | mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उनकी दृष्टि उस पर पड़ते ही सम्पूर्ण हिमालय पर्वत क्षण भर में अपनी मूल अवस्था में आ गया। वह देखने में अत्यंत सुन्दर हो गया। प्रसन्नता से भरे पक्षी वहाँ चहचहाने लगे। उस वन के वृक्ष सुन्दर पुष्पों से सुशोभित हो गए। 38।
On falling his gaze on it, the entire Himalaya mountain returned to its original state in a moment. It became extremely beautiful to look at. The birds filled with joy started chirping there. The trees of that forest became decorated with beautiful flowers. 38.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥