vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना
»
श्लोक 36
श्लोक
13.145.36
तं दृष्ट्वा मथितं शैलं शैलराजसुता तत:।
भगवन्तं प्रपन्ना वै साञ्जलिप्रग्रहा स्थिता॥ ३६॥
अनुवाद
उस पर्वत को जला हुआ देखकर गिरिराज की राजकुमारी देवी उमा हाथ जोड़कर भगवान शंकर के पास गईं।
Seeing that mountain burnt, Goddess Uma, the princess of Giriraja, went to Lord Shankar with folded hands.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas