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mahabharat 13.145.26: आते ही, मनमोहक मुस्कान के साथ देवी ने मनोरंजन या मौज-मस्ती के लिए मुस्कुराते हुए अचानक अपने हाथों से भगवान शिव की आंखें बंद कर दीं।   |   mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.145.26 
तत: स्मयन्ती पाणिभ्यां नर्मार्थं चारुहासिनी।
हरनेत्रे शुभे देवी सहसा सा समावृणोत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
आते ही, मनमोहक मुस्कान के साथ देवी ने मनोरंजन या मौज-मस्ती के लिए मुस्कुराते हुए अचानक अपने हाथों से भगवान शिव की आंखें बंद कर दीं।
 
As soon as she came, the goddess with a charming smile suddenly closed the eyes of Lord Shiva with her hands, smiling for entertainment or fun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)