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mahabharat 13.145.17-18h: दिव्य धातुओं से सुसज्जित पर्यायण के समान पर्वत शिखर पर विराजमान महान महादेव अत्यंत शोभायमान हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 13.145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 145: नारदजीके द्वारा हिमालय पर्वतपर भूतगणोंके सहित शिवजीकी शोभाका विस्तृत वर्णन, पार्वतीका आगमन, शिवजीकी दोनों आँखोंको अपने हाथोंसे बंद करना और तीसरे नेत्रका प्रकट होना, हिमालयका भस्म होना और पुन: प्राकृत अवस्थामें हो जाना तथा शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादकी उत्थापना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  13.145.17-18h 
तत्र देवो गिरितटे दिव्यधातुविभूषिते॥ १७॥
पर्यङ्क इव विभ्राजन्नुपविष्टो महामना:।
 
 
अनुवाद
दिव्य धातुओं से सुसज्जित पर्यायण के समान पर्वत शिखर पर विराजमान महान महादेव अत्यंत शोभायमान हो रहे थे।
 
Sitting on the peak of the mountain like a parayanka adorned with celestial metals, the great Mahadeva looked extremely beautiful. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)